थी न कुछ भी ख़ता मेरे दिल की
तोड़ के दिल हमें जताया है
तोड़ के दिल हमें जताया है
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शोर ग़ुल रोज़ होता है तेरा
पूछता हूँ मैं माजरा क्या है
पूछता हूँ मैं माजरा क्या है
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वो हमें ख़ाक कर रहे होंगे
हुस्न की आग को धुआँ कर के
हुस्न की आग को धुआँ कर के
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ज़िंदगी में गिला अगर होता
हम तुम्हें 'आशिक़ी नहीं कहते
हम तुम्हें 'आशिक़ी नहीं कहते
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