Zahraa Qarar

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@zahraa-qarar

Zahraa Qarar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Zahraa Qarar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

तुम्हारा बैग भी तय्यार कर के रक्खा है अकेली हिज्र के आज़ार क्यूँ उठाऊँ मैं — Zahraa Qarar

Ghazal

हक़ीक़तों को फ़साना नहीं बनाती मैं तुम्हारे ख़्वाब से ख़ुद को नहीं जगाती मैं वो फ़ाख़्ता की अलामत अगर समझ जाता तो उस के सामने तलवार क्यूँँ उठाती मैं जनाब वाक़ई मैं ने कहीं नहीं जाना वगर्ना आप की गाड़ी में बैठ जाती मैं फिर एक-दम मिरे पैरों में गिर गए कुछ लोग क़रीब था कि कोई फ़ैसला सुनाती मैं ख़ुदा का शुक्र कि वो रास्ते से लौट गया अगर वो आता तो उस को कहाँ बिठाती मैं किसी ख़याल में हाथों से छूट जाते हैं ये जान-बूझ के बर्तन नहीं गिराती मैं वो दिल हो या मिरी गुड़िया की मौत हो जो हो हमेशा सोग में चूल्हा नहीं जलाती मैं मैं मानती हूँ मिरा फ़ैसला ग़लत निकला तुम्हीं बताओ कि पहले किसे बचाती मैं मिरा बदन किसी तितली से कम नहीं 'ज़हरा' तो मर न जाती अगर तेरे हाथ आती मैं — Zahraa Qarar