Zia Farooqui

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@zia-farooqui

Zia Farooqui shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Zia Farooqui's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

बदन की क़ैद से छूटा तो लोग पहचाने तमाम-उम्र किसी को मिरा पता न मिला — Zia Farooqui

Ghazal

मत पूछिए क्या जीतने निकला था मैं घर से मत पूछिए क्या हार के लौटा हूँ सफ़र से कुछ मैं भी गिराँ-गोश था सुन ही नहीं पाया कुछ वक़्त भी गुज़रा है दबे पाँव इधर से कल रात भी था चौदहवीं का चाँद फ़लक पर कल रात भी इक क़ाफ़िला निकला था खंडर से इक अब्र का टुकड़ा है परिंदा है कि तू है ये कौन है जो रोज़ गुज़रता है इधर से क्या जाने मुझे तख़्त-ए-सुलैमाँ कहाँ ले जाए झपकी ही नहीं आँख मिरी ख़्वाब के डर से देखा तो किसी आँख में हैरत भी नहीं थी ख़ाली था मिरा खेल भी हर कैफ़-ओ-असर से सूरज के तआ'क़ुब में हुआ वो भी तह-ए-आब इक शख़्स 'ज़िया' साथ था हंगाम-ए-सहरस — Zia Farooqui