Zulfiqar aadil

Zulfiqar aadil

@zulfiqar-aadil

Zulfiqar aadil shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Zulfiqar aadil's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

2

Content

9

Likes

236

Shayari
Audios
  • Sher(6)
  • Ghazal(3)

Sher

सोचा ये था वक़्त मिला तो टूटी चीज़ें जोड़ेंगे अब कोने में ढेर लगा है बाक़ी कमरा ख़ाली है — Zulfiqar aadil
यूँ उठे इक दिन कि लोगों को हुआ अब्र का धोका हमारी ख़ाक पर — Zulfiqar aadil
नाम किसी का रटते रटते एक गिरह सी पड़ जाती है जिन का कोई नाम नहीं वो लोग ज़बाँ पर आ जाते हैं — Zulfiqar aadil
हम इंसाफ़ नहीं कर पाए दुनिया से भी दिल से भी तेरी जानिब मुड़ कर देखा या'नी जानिब-दारी की — Zulfiqar aadil
इक तस्वीर मुकम्मल कर के उन आँखों से डरता हूँ फ़स्लें पक जाने पर जैसे दहशत इक चिंगारी की — Zulfiqar aadil
बैठे बैठे फेंक दिया है आतिश-दान में क्या क्या कुछ मौसम इतना सर्द नहीं था जितनी आग जला ली है — Zulfiqar aadil

Ghazal

शब में दिन का बोझ उठाया दिन में शब-बेदारी की दिल पर दिल की ज़र्ब लगाई एक मोहब्बत जारी की कश्ती को कश्ती कह देना मुमकिन था आसान न था दरियाओं की ख़ाक उड़ाई मल्लाहों से यारी की कोई हद कोई अंदाज़ा कब तक करते जाना है ख़ंदक़ से ख़ामोशी गहरी उस से गहरी तारीकी इक तस्वीर मुकम्मल कर के उन आँखों से डरता हूँ फ़स्लें पक जाने पर जैसे दहशत इक चिंगारी की हम इंसाफ़ नहीं कर पाए दुनिया से भी दिल से भी तेरी जानिब मुड़ कर देखा या'नी जानिब-दारी की ख़्वाब अधूरे रह जाते हैं नींद मुकम्मल होने से आधे जागे आधे सोए ग़फ़लत भर हुश्यारी की जितना इन से भाग रहा हूँ उतना पीछे आती हैं एक सदा जारोब-कशी की इक आवाज़ भिकारी की अपने आप को गाली दे कर घूर रहा हूँ ताले को अलमारी में भूल गया हूँ फिर चाबी अलमारी की घटते बढ़ते साए से 'आदिल' लुत्फ़ उठाया सारा दिन आँगन की दीवार पे बैठे हम ने ख़ूब सवारी की — Zulfiqar aadil