darte darte bataa raha hooñ main | डरते डरते बता रहा हूँ मैं

  - Ajay Choubey

डरते डरते बता रहा हूँ मैं
ऐसे रस्ते पे जा रहा हूँ मैं

शे'र अच्छे नहीं मैं कहता हूँ
आख़िरी हैं सुना रहा हूँ मैं

ज़िंदगी है कोई तमाशा है
अब तो पर्दा गिरा रहा हूँ मैं

थक गया हूँ मैं मिन्नतें करके
ख़ामुशी से बता रहा हूँ मैं

मौत पे प्यार आ रहा है अब
हँसते हँसते बुला रहा हूँ मैं

साहिबा याद तुम मुझे रखना
उठ के महफ़िल से जा रहा हूँ मैं

ज़िन्दगी थी मेरी ग़ज़ल जैसी
उसको ही गुनगुना रहा हूँ मैं

हाँ अजय था ग़ज़ल का इक मक़्ता
उसपे ताली बजा रहा हूँ मैं

  - Ajay Choubey

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