सिखाया ख़ुदा ने हमेशा वफ़ा है
ज़माना हमेशा सिखाता अना है
दग़ा के अलावा दुआ भी तो देते
ख़फ़ा है तो मुझको बता क्यूँँ ख़फ़ा है
यही तो हमें सब हमेशा हैं कहते
ये मिलना मिलाना जहाँ पे नफ़ा है
सुना है तुझे सिर्फ़ हम से शग़फ़ है
ये जुमला तुम्हारा ये किस मर्तबा है
सितारों के आगे समझता जो ख़ुद को
ज़माने में वो सब सदास फ़ना है
अदब को अभी ही तो सीखा है 'आदिल'
यहाँ सब इसी रोग में मुब्तला है
our suggestion based on Aadil Warsi
As you were reading undefined Shayari