नज़ारे खो गए थे बाकी सब जब तुम मिले मुझ को
सितारे, चांँद, जुगनू, शाम तुझ में गुम मिले मुझ को
हुआ सब पर असर ऐसा तुम्हारी इस तकल्लुम का
बहुत सी बातें करने वाले भी गुम-सुम मिले मुझ को
तसव्वुर में बनाई मैंने जो तस्वीर थी जिसकी
हकी़क़त बन गई ऐसा लगा जब तुम मिले मुझ को
हो कर आज़ाद पिंजरों से वो कै़दी बन गए फिर से
परिंदे ज़ुल्फ़ों के जंगल में सारे गुम मिले मुझ को
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