नज़ारे खो गए थे बाकी सब जब तुम मिले मुझ को

सितारे, चांँद, जुगनू, शाम तुझ में गुम मिले मुझ को

हुआ सब पर असर ऐसा तुम्हारी इस तकल्लुम का
बहुत सी बातें करने वाले भी गुम-सुम मिले मुझ को

तसव्वुर में बनाई मैं ने जो तस्वीर थी जिस की
हकी़क़त बन गई ऐसा लगा जब तुम मिले मुझ को

हो कर आज़ाद पिंजरों से वो कै़दी बन गए फिर से
परिंदे ज़ुल्फ़ों के जंगल में सारे गुम मिले मुझ को

— Abhay Aadiv

More by Abhay Aadiv

Other ghazal from the same pen

See all from Abhay Aadiv →

Fantasy Shayari

Shers of fantasy.

All Fantasy Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling