तन्हा रस्तों से वो अंजान बहुत लगता है
आज कल इस लिए हैरान बहुत लगता है
उस को मालूम नहीं है कि मोहब्बत क्या है
उन को ये रास्ता आसान बहुत लगता है
ऐसा लगता तो नहीं है कि मेरे हो लेकिन
जो भी लगता है मेरी जान बहुत लगता है
मैं तुझे याद दिलाऊँ तो दिलाऊँ क्या क्या
तू तो पहले से पशेमान बहुत लगता है
अब यहाँ यूँ भी तिरा दिल नहीं लगना अंकित
अब यहाँ दिल नहीं सामान बहुत लगता है
— Ankit Yadav















