दिल को आज परिंदा कर दो ज़िंदा कर दो
या दिल का बाशिंदा कर दो ज़िंदा कर दो
मुँह को ख़ून लगा कर अपने हाथ न खींचो
मुझ को और दरिंदा कर दो ज़िंदा कर दो
चीख़ रहे हैं मेरे ज़ेहन-ओ-दिल और होंठ
मुझ को छू कर ज़िंदा कर दो ज़िंदा कर दो
अपने सुर्ख़ लबों से मेरी ग़ज़लें पढ़ कर
मेरे शे'र चुनिंदा कर दो ज़िंदा कर दो
दुश्मन अच्छा हो तो उस को मार न डालो
बस उस को शर्मिंदा कर दो ज़िंदा कर दो
— Ankit Yadav















