आदमी जैसी किसी शय से मुलाक़ात हुईकल मेरी ख़ुद से बड़ी देर तलक बात हुईदिन यूँ ही क़ैद रहा उस की ज़री ज़ुल्फ़ों मेंउस ने जब खोल दी ज़ुल्फ़ें तो कहीं रात हुई— Ankit Yadav