क्या लगता है जब चलता है
वह तो यार ग़ज़ब चलता है
बाहर पता नहीं लगता पर
दिल के अंदर सब चलता है
इन काँधों पर सर रखता है
सो लेता है तब चलता है
उन होंटों की प्यास बुझाने
दरिया बेमतलब चलता है
तब कहता था अब नईं चलता
अब कहता है अब चलता है
हाथी घोड़ा राजा प्यादा
जितनी चालें सब चलता है
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Ankit Yadav
our suggestion based on Ankit Yadav
As you were reading Dost Shayari Shayari