अपना हूँ कोई ग़ैर-निसाबी नहीं हूँ दोस्त
मानो तो रंग हूँ प गुलाबी नहीं हूँ दोस्त
शिद्दत लगेगी दिल की गिरह खोलने में अब
चुटकी में खोल दूँ तुझे चाबी नहीं हूँ दोस्त
पीता हूँ मैं कि ख़ुद से मुख़ातिब तो हो सकूँ
तुम ने समझ लिया है शराबी नहीं हूँ दोस्त
बरसों के बा'द भी है ज़बाँ पर किसी का नाम
या'नी मैं अस्ल में हूँ किताबी नहीं हूँ दोस्त
— Ankit Yadav















