हवा जब तेरी ज़ुल्फ़ों की चलेगी
घटा के साथ में छतरी चलेगी
किसी का नाम काटा जा रहा है
तुम्हारे नाम की तख़्ती चलेगी
हमें ही लोग क्यूँँ समझा रहे हैं
के कल से 'इश्क़ पर सख़्ती चलेगी
तिरा पैकर तराशा है ख़ुदा ने
तिरी डिग्री है तो फ़र्ज़ी चलेगी
जहाँ पर काम आ जाए शराफ़त
वहाँ भी अपनी ख़ुद-ग़र्ज़ी चलेगी
तिरे दिल पर हुकूमत कर रहा हूँ
मोहब्बत पर मिरी मर्ज़ी चलेगी
ये बेलें यूँँ लिपटती जा रही हैं
इन्हें मालूम है कैंची चलेगी
उछाली जा रही है उसकी इज़्ज़त
किसी दिन आग पर लड़की चलेगी
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