hawa jab teri zulfon ki chalegi | हवा जब तेरी ज़ुल्फ़ों की चलेगी

  - Ankit Yadav

हवा जब तेरी ज़ुल्फ़ों की चलेगी
घटा के साथ में छतरी चलेगी

किसी का नाम काटा जा रहा है
तुम्हारे नाम की तख़्ती चलेगी

हमें ही लोग क्यूँँ समझा रहे हैं
के कल से 'इश्क़ पर सख़्ती चलेगी

तिरा पैकर तराशा है ख़ुदा ने
तिरी डिग्री है तो फ़र्ज़ी चलेगी

जहाँ पर काम आ जाए शराफ़त
वहाँ भी अपनी ख़ुद-ग़र्ज़ी चलेगी

तिरे दिल पर हुकूमत कर रहा हूँ
मोहब्बत पर मिरी मर्ज़ी चलेगी

ये बेलें यूँँ लिपटती जा रही हैं
इन्हें मालूम है कैंची चलेगी

उछाली जा रही है उसकी इज़्ज़त
किसी दिन आग पर लड़की चलेगी

  - Ankit Yadav

Aanch Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Ankit Yadav

As you were reading Shayari by Ankit Yadav

Similar Writers

our suggestion based on Ankit Yadav

Similar Moods

As you were reading Aanch Shayari Shayari