Anukriti 'Tabassum'

Anukriti 'Tabassum'

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Anukriti 'Tabassum' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Anukriti 'Tabassum''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

मुझे उस सेे मुहब्बत सच बड़ी महँगी पड़ेगी अकेलेपन से उस ने इश्क़ ऐसा कर लिया है — Anukriti 'Tabassum'
मजबूर इतना कर दिया हालात ने हम को कि हम बस बारहा गिरते रहे और बारहा हँसते रहे — Anukriti 'Tabassum'
रक़ीबों को नहीं रोको सनम से इश्क़ करने से जिन्हें बर्बाद होना है, उन्हें बर्बाद होने दो — Anukriti 'Tabassum'
हमेशा साथ सबके तो ख़ुदा भी रह नहीं सकता बना कर औरतें उस ने ज़मीं को यूँँ किया जन्नत — Anukriti 'Tabassum'
यार जब से छोड़ कर तन्हा गया मुझ को यहाँ हिज्र के गुल बाग में हर दिन खिलाए बेबसी — Anukriti 'Tabassum'

Ghazal

न तुम नज़रें मिलाते, औ' न तुम सेे इश्क़ होता न हम सपने सजाते, औ' न तुम सेे इश्क़ होता जहाँ को छोड़ने का जो मुझे वा'दा किया था न तुम वा'दा निभाते, औ' न तुम सेे इश्क़ होता बहुत चालाक कहते थे मुझे सब लोग लेकिन न तुम पागल बुलाते, औ' न तुम सेे इश्क़ होता मेरा दिल आज हँसने से बहुत उक्ता गया था न तुम मुझ को रुलाते, औ' न तुम सेे इश्क़ होता विसाल-ए-यार होगा फिर कभी तो हिज्र होगा न तुम ये सच बताते , औ' न तुम सेे इश्क़ होता सुना है लोग अक्सर सच नशे में बोलते हैं न तुम बादा पिलाते, औ' न तुम सेे इश्क़ होता लबों पर नाम उस का ले के मुझ को देखते हो न तुम ऐसे जलाते, औ' न तुम सेे इश्क़ होता 'तबस्सुम' को तुम्हीं ने जान बोला सबके आगे न तुम यूँँ हक़ जताते, औ' न तुम सेे इश्क़ होता — Anukriti 'Tabassum'
जो ख़ुशी ही छीन ले वो नौकरी किस काम की चंद पैसों की भला ये तिश्नगी किस काम की दिल लगाया भी नहीं औ' दिल दुखाया भी नहीं ये नदामत है तुम्हें तो ज़िन्दगी किस काम की जब रिफ़ाक़त तीरगी से हो गई अच्छी भली ये दिया ये चाँदनी उफ़ रौशनी किस काम की सिलसिला कैसा तग़ाफ़ुल का हमारे दरमियाँ है मुहब्बत दिल में तो ये बे-रुख़ी किस काम की शहर के तन्हा सफ़र से भर गया है मन ये पर गाँव में अब तू नहीं है वापसी किस काम की हसरतें जज़्बात बातें कुछ न करते हैं बयाँ तो बताओ शे'र और ये शा'इरी किस काम की ऐ 'तबस्सुम' साँस लेना ज़िन्दगी बस है नहीं ज़िन्दगी है गर यही तो ख़ुद-कुशी किस काम की — Anukriti 'Tabassum'
ऐ ज़िन्दगी हर दर्द तेरा इस क़दर सहते रहे सब को नहीं थी कुछ ख़बर चुप-चाप हम ऐसे रहे कोशिश हवा ने की बहुत हम रात भर लड़ते रहे बुझती हुई लौ की तरह हारे नहीं जलते रहे मजबूर इतना कर दिया हालात ने हम को कि हम बस बारहा गिरते रहे और बारहा हँसते रहे मुमकिन नहीं था ये सफ़र, घुटने छिले तलवे फटे मंज़िल तुझे था में हुए तेरी तरफ़ बढ़ते रहे कुछ लोग कहते हैं मोहब्बत इक दफ़ा होती है बस तुम दूसरे के हो गए, हम उम्र भर रोते रहे कैसे 'तबस्सुम' ज़िन्दगी इक साल पीछे हो ज़रा ये काश होंठों पर मेरे यूँँ ही सदा खलते रहे — Anukriti 'Tabassum'