तुम सेे ये कहना था कब से बस तुम हो

मेरे दिल में रहने वाले बस तुम हो

आशिक़ पागल मजनू कितने देखे हैं
सपनों के शहज़ादे जैसे बस तुम हो

जाने कितने लोगों ने गुल भेजे हैं
मैं कहती हूँ उन से मेरे बस तुम हो

ऐसे तो मैं सब से बातें करती हूँ
होंठों पर कुछ लिखने वाले बस तुम हो

मौसम जैसे आशिक़ लोग बदलते हैं
पर जाँ मेरी दस सालों से बस तुम हो

ज़ाहिर कर दो इश्क़ 'तबस्सुम' से अपना
कब तक सब को बोलेगी ये बस तुम हो

— Anukriti 'Tabassum'

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