जो ख़ुशी ही छीन ले वो नौकरी किस काम की
चंद पैसों की भला ये तिश्नगी किस काम की
दिल लगाया भी नहीं औ' दिल दुखाया भी नहीं
ये नदामत है तुम्हें तो ज़िन्दगी किस काम की
जब रिफ़ाक़त तीरगी से हो गई अच्छी भली
ये दिया ये चाँदनी उफ़ रौशनी किस काम की
सिलसिला कैसा तग़ाफ़ुल का हमारे दर्मियाँ
है मुहब्बत दिल में तो ये बे-रुख़ी किस काम की
शहर के तन्हा सफ़र से भर गया है मन ये पर
गाँव में अब तू नहीं है वापसी किस काम की
हसरतें जज़्बात बातें कुछ न करते हैं बयाँ
तो बताओ शे'र और ये शायरी किस काम की
ऐ 'तबस्सुम' साँस लेना ज़िन्दगी बस है नहीं
ज़िन्दगी है गर यही तो ख़ुद-कुशी किस काम की
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Anukriti 'Tabassum'
our suggestion based on Anukriti 'Tabassum'
As you were reading Chehra Shayari Shayari