हर सितम तेरा सहूँगी आज़मा कर देखना

इक दफ़ा मुझ से तू अपना दिल लगाकर देखना

बुझ गए थे जो दिए तेरी उदासी से सनम
जल उठेंगे फिर सभी तू मुस्कुरा कर देखना

छोड़ कर जाना तिरा है लाज़मी तो जा मगर
मैं यहीं बैठी मिलूँगी वापस आ कर देखना

बाग के उस फूल को कहना अगर कुछ हो तुम्हें
तितलियों के कान में तुम फुसफुसाकर देखना

ऐ मुसाफ़िर मंज़िलें ख़ुद पास आएँगी तेरे
मंज़िलों से तू कभी नज़रें मिलाकर देखना

ख़ुश जो रखना है ख़ुदा को तो 'तबस्सुम' तू कभी
सामने माँ-बाप के बस सर झुकाकर देखना

— Anukriti 'Tabassum'

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Zulm Shayari

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