न तुम नज़रें मिलाते, औ' न तुम सेे 'इश्क़ होता
न हम सपने सजाते, औ' न तुम सेे 'इश्क़ होता
जहाँ को छोड़ने का जो मुझे वा'दा किया था
न तुम वा'दा निभाते, औ' न तुम सेे 'इश्क़ होता
बहुत चालाक कहते थे मुझे सब लोग लेकिन
न तुम पागल बुलाते, औ' न तुम सेे 'इश्क़ होता
मेरा दिल आज हँसने से बहुत उक्ता गया था
न तुम मुझको रुलाते, औ' न तुम सेे 'इश्क़ होता
विसाल-ए-यार होगा फिर कभी तो हिज्र होगा
न तुम ये सच बताते , औ' न तुम सेे 'इश्क़ होता
सुना है लोग अक्सर सच नशे में बोलते हैं
न तुम बादा पिलाते, औ' न तुम सेे 'इश्क़ होता
लबों पर नाम उसका लेके मुझको देखते हो
न तुम ऐसे जलाते, औ' न तुम सेे 'इश्क़ होता
'तबस्सुम' को तुम्हीं ने जान बोला सबके आगे
न तुम यूँँ हक़ जताते, औ' न तुम सेे 'इश्क़ होता
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