tod deti hai sabhi ko kaise h | तोड़ देती है सभी को कैसे हाए बेबसी

  - Anukriti 'Tabassum'

तोड़ देती है सभी को कैसे हाए बेबसी
अश्क़ सब के ये बहाए दिल जलाए बेबसी

सरहदों पर लड़ रहे हैं जो वतन के वास्ते
फ़िक्र बनकर उनकी माँओं को जगाए बेबसी

यार जब से छोड़ कर तन्हा गया मुझको यहाँ
हिज्र के गुल बाग में हर दिन खिलाए बेबसी

कर्ज़ में डूबा हुआ मज़दूर आख़िर क्या करे
'उम्र भर हर मोड़ पर उसको सताए बेबसी

इक तरीका था चुना मैंने ख़ुशी के वास्ते
ज़िन्दगी से दूर तुझको छोड़ आए बेबसी

उन चरागों का मुकद्दर ऐ 'तबस्सुम' सोच तू
हर दफ़ा जिनको जलाते ही बुझाए बेबसी

  - Anukriti 'Tabassum'

Bhai Shayari

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