तिलिस्म-ए-यार ये पहलू निकाल लेता हैकि पत्थरों से भी ख़ुशबू निकाल लेता हैहै बे-लिहाज़ कुछ ऐसा की आँख लगते हीवो सर के नीचे से बाजू निकाल लेता है— Tehzeeb Hafi