इस पार तो खड़ा हूँ मैं उस पार देखिए
मैं उसकी दस्तरस में हूँ बे-कार देखिए
इस शहर में तो अब यही दस्तूर–ए–आम है
उसकी नज़र से देखिए हर बार देखिए
ये रश्क–ए–दिल तो ठीक है उसका मैं क्या करूँँ
जो बीच में खड़ी है वो दीवार देखिए
इस रिस्क वाले काम में ख़तरे हैं जान–ए–जाँ
ये 'इश्क़ विश्क़ छोड़िए घर-बार देखिए
सस्ता ख़रीद कर कहीं महँगे में बेचना
इस दिल के रोज़गार का बाज़ार देखिए
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