मर्द हो तो शान से मर्दानगी का मान रखना
औरतों के उन दिनों में औरतों का ध्यान रखना
मुझको ग़ालिब मीर तो समझे नहीं उसने कहा था
तुम अगर शायर बनो तो शे'र को आसान रखना
लाख घर देखे मगर हमको तो भाई ये सहूलत
बंद रौशनदान रखना कमरे को वीरान रखना
हम से जो वादे हुए वो टूटते हैं हर घड़ी पर
हर वचन का मान रखना हाथ में जब पान रखना
As you were reading Shayari by Aman Mishra 'Anant'
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