मुझ पर ये ज़ुल्म-ए-हुस्न कोई कम नहीं यहाँ
बोसे की ख़्वाहिशात शिकायत के साथ साथ
इस आशिक़ी ने मुझ को सुख़न-वर बना दिया
मैं शेर कह रहा हूँ मुहब्बत के साथ साथ
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