मुझ पर ये ज़ुल्म-ए-हुस्न कोई कम नहीं यहाँबोसे की ख़्वाहिशात शिकायत के साथ साथइस आशिक़ी ने मुझ को सुख़न-वर बना दियामैं शे'र कह रहा हूँ मुहब्बत के साथ साथ— A R Sahil "Aleeg"