Meaning of

अज़ीयत

aziyat • اذیت

दर्द; पीड़ा; कष्ट

pain; suffering; distress

درد; تکلیف; مصیبت

Arabic

वाकिफ़ ज़रूर मेरी अज़ीयत‌ से होगा
एक दिन उस का सामना हक़ीक़त से होगा

हाल नहीं पूछते, ख़ुद को देख लेते हैं
हम जो हैं बर्बाद, वो ख़ैरियत से होगा

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दूजों का दुख समझने को बे हद ज़रूरी है
थोड़ी सही प दिल में अज़ीयत बनी रहे

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ऐ मिरी ज़ात के सुकूँ आ जा
थम न जाए कहीं जुनूँ आ जा

इस से पहले कि मैं अज़िय्यत में
अपनी आँखों को नोच लूँ आ जा

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बहुत दिन हो गए महरूम हूँ अज़ीयत से
ख़ुदा के वास्ते आओ मुझे अज़ीयत दो

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अज़िय्यत रहेगी मिले जो कभी हम
मोहब्बत लगी है बिछड़ने के ख़ातिर

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अज़िय्यत हो गया जीना हमारा
ज़रूरी ज़हर है पीना हमारा

हमें वो ज़ख़्म पे अब ज़ख़्म देकर
करेगा छलनी वो सीना हमारा

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मैं शहर से तेरे निकल कर अपनी बस्ती जाउँगा
मैं जाउँगा मौजूदगी में तेरी जल्दी जाउँगा

मैं जो तुम्हारी हर अज़िय्यत सह के अब तक ज़िंदा हूँ
जिस दिन गले से तुम लगाओगी मैं मर ही जाउँगा

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सबकी उम्मीदों को हार के देखो तुम
कितना मुश्किल फिर सांँसों को ढोना है

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देखा है अभी तुम ने तुम ने अभी जाना है
लेकिन ये ज़माने का अंदाज़ पुराना है

क्या कार-ए-अज़ीयत है करना उसे रुख़्सत भी
आँसू भी छुपाने हैं हँसकर भी दिखाना है

इस बज़्म-ए-मोहब्बत में कुछ देर ज़रा ठहरो
किस बात की जल्दी है आख़िर कहाँ जाना है

कुछ और कहा होता तो मान भी जाता दिल
पर तुम ने बनाया जो कॉमन सा बहाना है

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अज़िय्यत हमारी हमीं तक रहेगी
भरोसा नहीं है हमें अब किसी पर

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वाकिफ़ ज़रूर मेरी अज़ीयत‌ से होगा
एक दिन उस का सामना हक़ीक़त से होगा

हाल नहीं पूछते, ख़ुद को देख लेते हैं
हम जो हैं बर्बाद, वो ख़ैरियत से होगा

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दूजों का दुख समझने को बे हद ज़रूरी है
थोड़ी सही प दिल में अज़ीयत बनी रहे

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अज़ीयत गहरे भावनात्मक और शारीरिक कष्ट का भार वहन करता है। कविता में, यह अक्सर दिल की मौन चीखों को, उन अनकहे बोझों को उजागर करता है जो कोई अपने साथ लिए चलता है। यह केवल तत्काल दर्द के बारे में नहीं है, बल्कि उस छाया के बारे में है जो यह किसी के अस्तित्व पर डालता है।

कवि अज़ीयत का उपयोग मानव पीड़ा की गहराई को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर खोए हुए प्रेम, अस्तित्वगत भय, या जीवन के मौन संघर्षों के बारे में छंदों में प्रकट होता है। यह शब्द क्षणिक दर्द के विपरीत है, एक गहरी, स्थायी उदासी का सुझाव देता है।

अज़ीयत एक ऐसा शब्द है जो आत्मा के गहरे दर्द के साथ गूंजता है। यह हमें भीतर लड़ी गई मौन लड़ाइयों की याद दिलाता है।