Meaning of

अन-बन

an-ban • ان بن

विवाद; संघर्ष

discord; conflict

تنازعہ; جھگڑا

Hindi

परछाइयों से मेरी तो अब हो रही अन बन
सूना है उस के जाने से घर और ये आँगन

मैं ने चखा था जिस्म जो वो अब किसी का है
जूठा उठा के खा रहे मेरे सभी दुश्मन

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तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा
इंसान की औलाद है इंसान बनेगा

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सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के 'फ़िराक़'
क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया

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मेरी क़िस्मत कि ये दुनिया मुझे पहचानती है
लोग मर जाते हैं पहचान बनाने के लिए

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अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए
जिस में इंसान को इंसान बनाया जाए

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फ़रिश्ते से बढ़ कर है इंसान बनना
मगर इस में लगती है मेहनत ज़ियादा

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प्राण बिन देह जैसे अधुरी लगे
कृष्ण आधा लगे संग राधा न हो

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मैं ख़ुद में गूँजता हूँ बन के तेरा सन्नाटा
मुझे न देख मिरी तरह बे-ज़बाँ बन कर

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गैरों की बातों में आ कर,उस ने रिश्ता तोड़ दिया
तस्वीरों में उस की मैं ने, कान बनाना छोड़ दिया

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सब के सब फ़क़त हम इंसान बन के आए थे
फिर हुआ ये मिल कर मज़हब बना दिए हम ने

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परछाइयों से मेरी तो अब हो रही अन बन
सूना है उस के जाने से घर और ये आँगन

मैं ने चखा था जिस्म जो वो अब किसी का है
जूठा उठा के खा रहे मेरे सभी दुश्मन

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तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा
इंसान की औलाद है इंसान बनेगा

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'अन-बन' शब्द असहमति के सार को पकड़ता है, जो सामंजस्य में एक दरार है। कविता में, यह अक्सर आंतरिक उथल-पुथल या बाहरी संघर्षों को दर्शाता है जो मन की शांति को बाधित करते हैं।

कवि 'अन-बन' का उपयोग भावनात्मक संघर्ष, प्रेमियों के बीच तनाव, या स्वयं के भीतर संघर्ष की थीम का पता लगाने के लिए करते हैं। यह मानव स्थिति का एक दर्पण है, जो जीवन के अपरिहार्य टकरावों को दर्शाता है।

कविता में 'अन-बन' जीवन के अंतर्निहित संघर्षों का प्रतिबिंब है, जो उस नाजुक संतुलन की याद दिलाता है जिसे हम बनाए रखने का प्रयास करते हैं।