Meaning of

अरक़

arq • ارق

सार; अर्क; आत्मा

essence; extract; spirit

جوہر; عرق; روح

Arabic

ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया — Sahir Ludhianvi
मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले — Mirza Ghalib
पूछने पर वो ये कह देगा, यूँँ ही शे'र हुए वैसे यूँँ ही कोई हरकत नहीं की जाती है — Fareeha Naqvi
उस के जाने और आने में फ़क़त ये फ़र्क़ है दूर जाती मौत है तो पास आती ज़िन्दगी — Divy Kamaldhwaj
तमाम फ़र्क़ मोहब्बत में एक बात के हैं वो अपनी ज़ात का नईं है हम उस की ज़ात के हैं — Pallav Mishra
हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं — Sahir Ludhianvi
हिन्दी में और उर्दू में फ़र्क़ है तो इतना वो ख़्वाब देखते हैं हम देखते हैं सपना — Unknown
मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया बर्क़ सी गिर गई काम ही कर गई आग ऐसी लगाई मज़ा आ गया — Fana Bulandshahri

मूल रूप में 'अरक़' का अर्थ किसी पदार्थ का आसवित सार या अर्क होता है, जो उसकी शुद्धतम रूप को दर्शाता है। कविता में, यह आसवन की धारणा भावनाओं, विचारों या आत्मा के सार को पकड़ने के लिए विस्तारित होती है, जो भावना की शुद्धता और एकाग्रता का सुझाव देती है।

'अरक़' का उपयोग कवि अक्सर प्रेम की शुद्धता या तड़प के आसवित सार को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह उन केंद्रित भावनाओं का प्रतीक हो सकता है जो सभी सतही परतों के हटने के बाद बचती हैं।

'अरक़' उस सार को पकड़ता है जो भीतर छिपा होता है, भीतर की शुद्धता की याद दिलाता है।