Meaning of

अरमान

armaan • ارمان

इच्छा; लालसा; अभिलाषा

desire; longing; wish

خواہش; آرزو; تمنا

Persian

मुहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है
मगर ये जान ले शाइ'र अदास चोट लगती है

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मेरा अरमान मेरी ख़्वाहिश नहीं है
ये दुनिया मेरी फ़रमाइश नहीं है

मैं तेरे ख़्वाब वापस कर रहा हूँ
मेरी आँखों में गुंजाइश नहीं है

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हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

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रंग को मलने से ही रौनक़ नइँ आती
हर इक नुस्ख़ा यार किताबी होता है

देखो शर्माना भी बहुत ज़रूरी है
शर्माने से रंग गुलाबी होता है

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न हिंदू हूँ मैं नइँ मुसलमान हूँ मैं
दरिंदों की दुनिया में इंसान हूँ मैं

अदा कर मुझे तू इबादत के जैसे
मेरी जाँ तेरे दिल का अरमान हूँ मैं

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आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या
क्या बताऊँ कि मेरे दिल में है अरमाँ क्या क्या

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इस क़दर था खटमलों का चारपाई में हुजूम
वस्ल का दिल से मिरे अरमान रुख़्सत हो गया

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नहीं हर चंद किसी गुम-शुदा जन्नत की तलाश
इक न इक ख़ुल्द-ए-तरब-नाक का अरमाँ है ज़रूर

बज़्म-ए-दोशंबा की हसरत तो नहीं है मुझ को
मेरी नज़रों में कोई और शबिस्ताँ है ज़रूर

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ये क़त्ल-ए-आम और बे-इज़्न क़त्ल-ए-आम क्या कहिए
ये बिस्मिल कैसे बिस्मिल हैं जिन्हें क़ातिल नहीं मिलता

वहाँ कितनों को तख़्त ओ ताज का अरमाँ है क्या कहिए
जहाँ साइल को अक्सर कासा-ए-साइल नहीं मिलता

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दिल हुआ करता था पहले, अब कहाँ बाक़ी रहा
जल गए अरमान सारे, बस धुआँ बाक़ी रहा

हम कहो क्या क्या बताएँ, क्या है खोया इश्क़ में
ये जहाँ बाक़ी रहा ना वो जहाँ बाक़ी रहा

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मुहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है
मगर ये जान ले शाइ'र अदास चोट लगती है

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मेरा अरमान मेरी ख़्वाहिश नहीं है
ये दुनिया मेरी फ़रमाइश नहीं है

मैं तेरे ख़्वाब वापस कर रहा हूँ
मेरी आँखों में गुंजाइश नहीं है

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'अरमान' शब्द दिल की गहराइयों में छिपी इच्छाओं का कोमल भार लिए हुए है। अपने मूल अर्थ में, यह एक ऐसी लालसा की बात करता है जो व्यक्तिगत और गहन होती है। कविता ने इस शब्द को आत्मा में बसे उन मौन अभिलाषाओं को व्यक्त करने के लिए अपनाया है, जो अक्सर अनकही होती हैं, परंतु गहराई से महसूस की जाती हैं।

कवि अक्सर 'अरमान' का उपयोग दिल की मौन पुकारों को जगाने के लिए करते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो लालसा के कैनवास को कोमल रेखाओं से रंगता है। स्पष्ट इच्छाओं के विपरीत, 'अरमान' एक अधिक आत्मविश्लेषी लालसा का सुझाव देता है।

कविता के क्षेत्र में, 'अरमान' आत्मा के मौन सपनों का एक माध्यम बन जाता है। यह उन आशाओं की फुसफुसाहट करता है जो दिल की छायाओं में बनी रहती हैं।