Meaning of

अरहम

arham • ارحم

सबसे दयालु; सबसे कृपालु

most merciful; kindest

سب سے رحم دل; سب سے مہربان

Arabic

कई दुश्वारियाँ गुज़री तुम्हारा ग़म नहीं गुजरा
ज़ख़्म थे जब बदन पे, कोई मरहम नहीं गुजरा

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ये बात अभी सब को समझ आई नहीं है
दीवाना है दीवाना तमन्नाई नहीं है

दिल मेरा दुखाकर ये मुझे तेरा मनाना
मरहम है फ़क़त ज़ख़्म की भरपाई नहीं है

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हाँ रहते हैं अब राहों में,
तुझ बिन तो हम बेघर निकले,

आशा थी मरहम दोगे तुम,
पर आखर सब ख़ंजर निकले

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तेरी बाँहों के मरहम को
मैं रहता हूँ घाइल बनके

दिल तो तेरा दीवाना है
अब तू भी आ कायल बनके

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न हो बरहम जो बोसा बे-इजाज़त ले लिया मैं ने
चलो जाने दो बे-ताबी में ऐसा हो ही जाता है

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वक़्त हर ज़ख़्म का मरहम तो नहीं बन सकता
दर्द कुछ होते हैं ता-उम्र रुलाने वाले

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कोई हम से भी पूछे ये ग़म क्या है
चाहत में करते हैं वो मातम क्या है

जिगरी आते हैं कुछ ले कर मेरे घर
कहते हैं हम उन सेे ये मरहम क्या है

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जब भी माज़ी के ज़ख़्मों पर मुझे हवा लगती है
बन के मरहम दिल पे सिगरेट ही दवा लगती है

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इतनी बे-ताबी कहाँ जाएज़ है यारों इश्क़ में
बस अभी मरहम लगाया है असर होने तो दो

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भरता भी क्यूँँ कि ज़ख़्म था तेरे फ़िराक़ का
फिर हम ने तेरी याद को मरहम समझ लिया

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कई दुश्वारियाँ गुज़री तुम्हारा ग़म नहीं गुजरा
ज़ख़्म थे जब बदन पे, कोई मरहम नहीं गुजरा

6

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ये बात अभी सब को समझ आई नहीं है
दीवाना है दीवाना तमन्नाई नहीं है

दिल मेरा दुखाकर ये मुझे तेरा मनाना
मरहम है फ़क़त ज़ख़्म की भरपाई नहीं है

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अरहम एक गहरी दया और कृपा का भाव उत्पन्न करता है, जो अक्सर दिव्य गुणों से जुड़ा होता है। कविता में, यह केवल सहानुभूति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एक असीम, बिना शर्त प्रेम को भी समेटे होता है जो मानवीय सीमाओं से परे होता है।

कवि अक्सर 'अरहम' का उपयोग दिव्य या पारलौकिक प्रेम का वर्णन करने के लिए करते हैं। इसे मानवीय कमजोरी और दिव्य पूर्णता के बीच के अंतर को दर्शाने के लिए भी प्रयोग किया जाता है। यह आध्यात्मिक लालसा या दिव्य संबंध की भावना को उत्पन्न करने के लिए भी प्रयुक्त होता है।

अरहम दिव्य करुणा का सार है, उस असीम प्रेम की याद दिलाता है जिसे कविता पकड़ने की कोशिश करती है।