Meaning of

अहल-ए-जहाँ

ahl-e-jahaan • اہل جہاں

दुनिया के लोग; दुनियावी लोग

people of the world; worldly people

دنیا کے لوگ; دنیاوی لوگ

Persian

ग़रीब-ओ-बे-कसों की सब हिमायत क्यूँ नहीं करते
ग़लत को तुम ग़लत कहने की जुरअत क्यूँ नहीं करते

अगर अहल-ए-जहाँ ज़िंदा हो तो बे-ख़ौफ़ होकर फिर
भला ज़ालिम हुकूमत की मज़म्मत क्यूँ नहीं करते

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बख़्शी हैं हम को इश्क़ ने वो जुरअतें 'मजाज़'
डरते नहीं सियासत-ए-अहल-ए-जहाँ से हम

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रहे जिस की ख़ुश्बू तमाम उम्र,तू तोहफ़तन वो गुलाब दे
नए रंग भर दिल-ओ-ज़ेहन में, मेरे यार मुझ को किताब दे

मैं शरीफ़-ओ-अहल-ए-जहाँ में 'अच्छों' की झूठी बातों से तंग हूँ
वो जो सामने मेरे सच कहे, मुझे दोस्त ऐसे ख़राब दे

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बता कैसे समझते फिर भला अहल-ए-जहाँ तुम को
न तुम को जान पाए प्रिंस तेरे जानने वाले

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ग़रीब-ओ-बे-कसों की सब हिमायत क्यूँ नहीं करते
ग़लत को तुम ग़लत कहने की जुरअत क्यूँ नहीं करते

अगर अहल-ए-जहाँ ज़िंदा हो तो बे-ख़ौफ़ होकर फिर
भला ज़ालिम हुकूमत की मज़म्मत क्यूँ नहीं करते

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बख़्शी हैं हम को इश्क़ ने वो जुरअतें 'मजाज़'
डरते नहीं सियासत-ए-अहल-ए-जहाँ से हम

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अहल-ए-जहाँ मानव अनुभव की विशालता और उन लोगों की सामूहिक चेतना को दर्शाता है जो इस दुनिया में रहते हैं। कविता में, यह अक्सर मानव भावनाओं की विविधता और जीवन की साझा यात्रा को प्रतिबिंबित करता है।

कवि अहल-ए-जहाँ का उपयोग सार्वभौमिकता और संबंध के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह दुनियादार या जीवन का बहुत कुछ देख चुके लोगों को दर्शा सकता है। यह अलग-थलग या भोले लोगों के विपरीत है।

अहल-ए-जहाँ साझा मानव यात्रा पर चिंतन के लिए आमंत्रित करता है। यह हमें हमारे अनुभवों की परस्पर संबंधता की याद दिलाता है।