Meaning of

आक़ा

aqaa • بے چارگی دوش

मालिक; स्वामी; प्रभु

master; lord; owner

مالک; آقا; خداوند

Arabic

हर मुलाक़ात पे सीने से लगाने वाले
कितने प्यारे हैं मुझे छोड़ के जाने वाले

ज़िंदगी भर की मोहब्बत का सिला ले डूबे
कैसे नादाँ थे तिरे जान से जाने वाले

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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी
आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी

हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं
ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी

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दिन में मिल लेते कहीं रात ज़रूरी थी क्या?
बेनतीजा ये मुलाक़ात ज़रूरी थी क्या

मुझ सेे कहते तो मैं आँखों में बुला लेता तुम्हें
भीगने के लिए बरसात ज़रूरी थी क्या

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ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ
मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया

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उसी मक़ाम पे कल मुझ को देख कर तन्हा
बहुत उदास हुए फूल बेचने वाले

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अब के हम तर्क-ए-रसूमात कर के देखते हैं
बीच वालों के बिना बात कर के देखते हैं

इस सेे पहले कि कोई फ़ैसला तलवार करे
आख़िरी बार मुलाक़ात कर के देखते हैं

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मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी
किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी

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नक़्शा उठा के कोई नया शहर ढूँढ़िए
इस शहर में तो सब से मुलाक़ात हो गई

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न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की

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जगह की क़ैद नहीं थी कोई कहीं बैठे
जहाँ मक़ाम हमारा था हम वहीं बैठे

अमीर-ए-शहर के आने पे उठना पड़ता है
लिहाज़ा अगली सफ़ों में कभी नहीं बैठे

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हर मुलाक़ात पे सीने से लगाने वाले
कितने प्यारे हैं मुझे छोड़ के जाने वाले

ज़िंदगी भर की मोहब्बत का सिला ले डूबे
कैसे नादाँ थे तिरे जान से जाने वाले

53

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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी
आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी

हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं
ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी

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'आक़ा' का मूल अर्थ अधिकार और स्वामित्व से जुड़ा है, जो शक्ति और सम्मान का प्रतीक है। कविता में, यह अक्सर दिव्यता या प्रिय व्यक्ति का प्रतीक बन जाता है, भावनात्मक परिदृश्य को श्रद्धा और भक्ति से भर देता है।

कवि 'आक़ा' का उपयोग भक्ति और समर्पण की भावना को जगाने के लिए करते हैं। यह दिव्य सत्ता, प्रिय या किसी अधिकारपूर्ण व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होता है। यह शब्द अक्सर सेवा या लालसा के विषयों के साथ विरोधाभास में आता है।

'आक़ा' शक्ति और भक्ति की द्वैतता को समेटे हुए है, जो हमें दिव्यता और प्रिय से जोड़ने वाले बंधनों की याद दिलाता है।