मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थीआँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थीहिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहींऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी— Ismail Raaz