Meaning of

इंक़िलाब

inqilaab • انقلاب

क्रांति; उथल-पुथल; परिवर्तन

revolution; upheaval; transformation

انقلاب; ہلچل; تبدیلی

Arabic

कोई तो सूद चुकाए कोई तो ज़िम्मा ले उस इंक़िलाब का जो आज तक उधार सा है — Kaifi Azmi
इंक़लाब आएगा रफ़्तार से मायूस न हो बहुत आहिस्ता नहीं है जो बहुत तेज़ नहीं — Ali Sardar Jafri
"शहीद-ए-आज़म भगतसिंह" आँखों में वो आँसू नहीं कुछ ख़्वाब सँजोया करता था वतन की आज़ादी के ख़ातिर खूनी आँसू रोया करता था आज़ादी का दीवाना था वो रगों में उबाल ख़ानदानी था जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना वो वीर भगत बलिदानी था अंगारों पर चल कर जिस ने एक नई राह बनाई थी उस मतवाले शे'र ने क़सम आज़ादी की खाई थी चाहे उम्र कम रही हो लेकिन वो एक लंबी कहानी था जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना वो वीर भगत बलिदानी था जिस के दिल में सिर्फ़ और सिर्फ़ इन्कलाब की आग थी आँखों में थी जलती ज्वाला लिबास जिस का त्याग थी हर दिल में निशाँ छोड़ गया वो भारत माँ की निशानी था जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना वो वीर भगत बलिदानी था जब तक धरती-अम्बर होंगे मिट न सकेगा नाम तुम्हारा भारत का हर बच्चा-बच्चा याद रखेगा काम तुम्हारा समुंदर से भी गहरा था जो ख़ुद में ही एक रवानी था जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना वो वीर भगत बलिदानी था — "Nadeem khan' Kaavish"
फ़क़त ग़ुलामियों का नर्म-सा क़दम है इश्क़ भी ये बात और है कि नाम इंक़िलाब का दिया — arjun chamoli
बहुत बर्बाद हैं लेकिन सदा-ए-इंक़लाब आए वहीं से वो पुकार उठेगा जो ज़र्रा जहाँ होगा — Ali Sardar Jafri
देख रफ़्तार-ए-इंक़लाब 'फ़िराक़' कितनी आहिस्ता और कितनी तेज़ — Firaq Gorakhpuri
जब तक कि आदमी को सुकूँ की तलाश है सौ इंक़िलाब आएँगे इक इंक़िलाब क्या — Dharamraj deshraj
इक इंक़लाब नया आज हो गया है क्या मुझे ज़माने ने ख़ुद ही बदल दिया है क्या — Navneet krishna

मूल रूप से, 'इंक़िलाब' का अर्थ गहरी परिवर्तन से है, जो अक्सर राजनीतिक या सामाजिक उथल-पुथल से जुड़ा होता है। कविता में, यह उथल-पुथल भरी भावनाओं और परिवर्तन के जोश को दर्शाता है, चाहे वह समाज में हो या मानव हृदय में।

'इंक़िलाब' का उपयोग कवि अक्सर विद्रोह और परिवर्तन की भावना को जगाने के लिए करते हैं। यह पुराने मानदंडों के टूटने या नई चेतना के जागरण का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द व्यक्तिगत और सामूहिक संघर्षों के साथ गूंजता है।

इंक़िलाब परिवर्तन के सार को समेटे हुए है, जीवन और समाज की निरंतर विकसित होती प्रकृति की याद दिलाता है।