Meaning of

इज़ाफ़

izaf • اضاف

वृद्धि; बढ़ोतरी; जोड़

addition; increase; augmentation

اضافہ; بڑھوتری; اضافہ

Arabic

मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में — Anis shah anis
मोहब्बत में इज़ाफ़ा हो रहा है मगर ख़र्चा ज़ियादा हो रहा है — anupam shah
इस नाम-ए-इश्क़ को छोड़ इस से अब ग़म में इज़ाफ़ा होता है — A R Sahil "Aleeg"
बहुत हैं लोग दुनिया में मगर फिर भी हमें क्यूँँ बस इज़ाफ़त 'जानवी' से है — ABhishek Parashar
मेरे हर ग़म में वो इज़ाफ़ा दानिस्ता करती है और ये काम भी वो आहिस्ता-आहिस्ता करती है — Nakul kumar
मोहब्बत में इज़ाफ़ा कर गया है मुझे वो फिर इशारा कर गया है — Meem Maroof Ashraf
दुखों में इज़ाफ़ा ख़ुशियों का नुक़सान मत करो गुज़र जाओ यार ज़िंदगी एहसान मत करो — Aman Deep singh

'इज़ाफ़' मूल रूप से वृद्धि या जोड़ का संकेत देता है, अक्सर विकास या संवर्धन के संदर्भ में उपयोग किया जाता है। कविता में, यह किसी चीज़ के अपनी मूल सीमाओं से परे विस्तार का विचार प्रस्तुत करता है, जो प्रचुरता या अतिप्रवाह का आभास देता है।

'इज़ाफ़' का उपयोग कवि प्रेम या दुःख की उमड़ती भावनाओं का वर्णन करने के लिए करते हैं। यह ब्रह्मांड की असीम प्रकृति या मानव आत्मा की असीम संभावनाओं को भी दर्शा सकता है।

कविता के क्षेत्र में, 'इज़ाफ़' असीम विस्तार का प्रतीक बन जाता है, भावनाओं और अस्तित्व की असीम प्रकृति का प्रमाण।