Meaning of

इज़ाफ़ा

izafa • اضافہ

वृद्धि; बढ़ोतरी; जोड़

addition; increase; augmentation

اضافہ; بڑھوتری; اضافہ

Arabic

दुखों में इज़ाफ़ा ख़ुशियों का नुक़सान मत करो
गुज़र जाओ यार ज़िंदगी एहसान मत करो

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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में

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बहुत हैं लोग दुनिया में मगर फिर भी
हमें क्यूँँ बस इज़ाफ़त 'जानवी' से है

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मोहब्बत में इज़ाफ़ा हो रहा है
मगर ख़र्चा ज़ियादा हो रहा है

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मेरे हर ग़म में वो इज़ाफ़ा दानिस्ता करती है
और ये काम भी वो आहिस्ता-आहिस्ता करती है

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क़ल्ब-ए-हज़ी मता-ए-जाँ यूँँ शाद कीजिए
कसरत के साथ आप हमें याद कीजिए

दौलत में चाहते हो इज़ाफा अगर शजर
तो बेकसों यतीमों की इमदाद कीजिए

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मोहब्बत में इज़ाफ़ा कर गया है
मुझे वो फिर इशारा कर गया है

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इस नाम-ए-इश्क़ को छोड़ इस से
अब ग़म में इज़ाफ़ा होता है

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दुखों में इज़ाफ़ा ख़ुशियों का नुक़सान मत करो
गुज़र जाओ यार ज़िंदगी एहसान मत करो

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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में

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'इज़ाफ़ा' शब्द वृद्धि और विस्तार का संकेत देता है, समृद्धि की ओर एक आंदोलन। कविता में, यह अक्सर आत्मा की समृद्धि का प्रतीक होता है, जहाँ अनुभव और भावनाएँ व्यक्ति के अस्तित्व में परतें जोड़ती हैं।

कवि 'इज़ाफ़ा' का उपयोग वृद्धि और परिवर्तन के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो जीवन की विकास और फलने-फूलने की क्षमता की बात करता है।

कविता की दुनिया में, 'इज़ाफ़ा' वृद्धि की अनंत संभावनाओं और जीवन के खुलने की सुंदरता की याद दिलाता है।