Meaning of

इन्तिहा

intihaa • موتی

अंत; सीमा; चरम

end; limit; extremity

انت; حد; انتہا

Arabic

हम भटकते रहे हैं यहाँ दर-ब-दर
तुम ने आ कर के जीवन सँवारा प्रिये

जब मेरे दर्द की इंतिहाँ हो गई
मैं ने पन्नों पे तुम को उतारा प्रिये

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याद उसे इंतिहाई करते हैं
सो हम उस की बुराई करते हैं

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फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था
वो मुझ से इंतिहाई ख़ुश ख़फ़ा होने से पहले था

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आँसू हमारे गिर गए उन की निगाह से
इन मोतियों की अब कोई क़ीमत नहीं रही

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जो मोतियों की तलब ने कभी उदास किया
तो हम भी राह से कंकर समेट लाए बहुत

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किसी को खोना हो तो इक तरीक़ा है
मुहब्बत उस सेे तुम बे-इंतिहा करना

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पुतलियों में घुला समुंदर है
मोतियों की दुकान आँखें हैं

आप तहक़ीक़ ही नहीं करते
सब ख़ज़ानों की खान आँखें हैं

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चला आया मकाँ ख़ाली करा कर मैं
जले हैं आशियाने बे-ज़बाँ के भी

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घुटन की इन्तिहा पर पूछते हैं हाल कैसा है
कि उन का पूछना यूँँ हाल भी जंजाल जैसा है

हुनर है और क़ाबिल हो मगर क्या ही उखाड़ोगे
चलन उस का है 'माही' आज जिस के पास पैसा है

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दिल धड़कना मिरा बे-वजह तो नहीं
प्यार बे-इंतिहा है मुझे आप से

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हम भटकते रहे हैं यहाँ दर-ब-दर
तुम ने आ कर के जीवन सँवारा प्रिये

जब मेरे दर्द की इंतिहाँ हो गई
मैं ने पन्नों पे तुम को उतारा प्रिये

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याद उसे इंतिहाई करते हैं
सो हम उस की बुराई करते हैं

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‘इन्तिहा’ शब्द उस अंतिम बिंदु का आभास कराता है, जहाँ सीमाएँ मिट जाती हैं और पूर्णता का सार महसूस होता है। कविता में, यह अक्सर भावनाओं के चरमोत्कर्ष का प्रतीक होता है, चाहे वह खुशी हो या दुःख, मानव अनुभव की गहराई को पकड़ता है।

कवि अक्सर 'इन्तिहा' का उपयोग प्रेम, निराशा या सुंदरता की अंतिम सीमाओं को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह भावनात्मक यात्रा के शिखर या क्षण की अंतिमता को दर्शा सकता है। यह शुरुआत के विपरीत होता है, अस्तित्व की चक्रीय प्रकृति को उजागर करता है।

कविता में, 'इन्तिहा' जीवन की क्षणभंगुर प्रकृति की याद दिलाता है। यह अंत की भावना को पकड़ता है, समापन में पाई जाने वाली सुंदरता पर चिंतन करने का आग्रह करता है।