Meaning of

इफ़रात

ifraat • افرات

प्रचुरता; अधिकता

abundance; excess

کثرت; زیادتی

Arabic

क़ल्ब कुछ इसलिए वाशाद नहीं दुनिया में
मेरी तासीर के अफ़राद नहीं दुनिया में

हब्स हर साँस ब-इफ़रात हुआ जाता है
गोया मौजूद कहीं बा'द नहीं दुनिया में

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हम उस
में बैठ के करते हैं साधना तेरी
हमारा जिस्म भी भीतर से एक शिवाला है

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सपने गए सुकून भी उल्फ़त चली गई
मिलने की अपने आप से फ़ुर्सत चली गई

मेरी तो बोलने की ही आदत चली गई
तेरे ही साथ सारी शरारत चली गई

खुशियांँ थीं उस सेे घर में थीं आंँगन में रौनकें
बिटिया के साथ घर की भी बरकत चली गई

छूटा तुम्हारा साथ तो बाक़ी ही क्या बचा
दिल में जो पल रही थी वो हसरत चली गई

आते नहीं फ़क़ीर न साइल भी आजकल
माँ क्या गई कि घर की रिवायत चली गई

मेरे सुख़न पे तू ने उठाईं जो उँगलियाँ
मेरी तमाम उम्र की मेहनत चली गई

यूँँंँ भी कभी जहान में इफ़रात में न थी
थोड़ी बहुत थी वो भी सदाक़त चली गई

होती नहीं है शे'र की आमद भी अब नज़र
तुम क्या गए कि लफ़्ज़ की ताक़त चली गई

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साधना का यज्ञ ये है
आहुती दूँ ज़िंदगी की

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एक ही कामना है चले आइए
मौन की साधना है चले आइए

मेरी निष्फल रही प्रार्थनाएँ सभी
प्रीत की वंदना है चले आइए

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हमारी सफलता का भी पेड़ देखो
नहीं सिर्फ़ श्रम साधना से हरा है

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क़ल्ब कुछ इसलिए वाशाद नहीं दुनिया में
मेरी तासीर के अफ़राद नहीं दुनिया में

हब्स हर साँस ब-इफ़रात हुआ जाता है
गोया मौजूद कहीं बा'द नहीं दुनिया में

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हम उस
में बैठ के करते हैं साधना तेरी
हमारा जिस्म भी भीतर से एक शिवाला है

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इफ़रात शब्द एक ऐसी प्रचुरता का भाव उत्पन्न करता है, जहाँ किसी चीज़ की मात्रा या तीव्रता साधारण से परे हो जाती है। कविता में, यह अक्सर भावनाओं या परिस्थितियों की प्रबलता को दर्शाता है, जहाँ सीमाएँ पार हो जाती हैं।

कवि 'इफ़रात' का उपयोग प्रेम, दुःख, या आनंद की प्रबलता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह भावनाओं के ऐसे परिदृश्य को चित्रित कर सकता है जहाँ सब कुछ अधिकता में हो, असीमता की जीवंत छवि बनाते हुए।

कविता में, 'इफ़रात' असीम भावनाओं का एक कैनवास बन जाता है, मानव अनुभव की विशालता को चित्रित करता है।