Meaning of

इफ़रात

ifraat • افرات

प्रचुरता; अधिकता

abundance; excess

کثرت; زیادتی

Arabic

साधना का यज्ञ ये है आहुती दूँ ज़िंदगी की — Vinod Ganeshpure
हमारी सफलता का भी पेड़ देखो नहीं सिर्फ़ श्रम साधना से हरा है — Vinod Ganeshpure
सपने गए सुकून भी उल्फ़त चली गई मिलने की अपने आप से फ़ुर्सत चली गई मेरी तो बोलने की ही आदत चली गई तेरे ही साथ सारी शरारत चली गई खुशियांँ थीं उस सेे घर में थीं आंँगन में रौनकें बिटिया के साथ घर की भी बरकत चली गई छूटा तुम्हारा साथ तो बाक़ी ही क्या बचा दिल में जो पल रही थी वो हसरत चली गई आते नहीं फ़क़ीर न साइल भी आजकल माँ क्या गई कि घर की रिवायत चली गई मेरे सुख़न पे तू ने उठाईं जो उँगलियाँ मेरी तमाम उम्र की मेहनत चली गई यूँँंँ भी कभी जहान में इफ़रात में न थी थोड़ी बहुत थी वो भी सदाक़त चली गई होती नहीं है शे'र की आमद भी अब नज़र तुम क्या गए कि लफ़्ज़ की ताक़त चली गई — Nazar Dwivedi

इफ़रात शब्द एक ऐसी प्रचुरता का भाव उत्पन्न करता है, जहाँ किसी चीज़ की मात्रा या तीव्रता साधारण से परे हो जाती है। कविता में, यह अक्सर भावनाओं या परिस्थितियों की प्रबलता को दर्शाता है, जहाँ सीमाएँ पार हो जाती हैं।

कवि 'इफ़रात' का उपयोग प्रेम, दुःख, या आनंद की प्रबलता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह भावनाओं के ऐसे परिदृश्य को चित्रित कर सकता है जहाँ सब कुछ अधिकता में हो, असीमता की जीवंत छवि बनाते हुए।

कविता में, 'इफ़रात' असीम भावनाओं का एक कैनवास बन जाता है, मानव अनुभव की विशालता को चित्रित करता है।