क़ल्ब कुछ इसलिए वाशाद नहीं दुनिया मेंमेरी तासीर के अफ़राद नहीं दुनिया मेंहब्स हर साँस ब-इफ़रात हुआ जाता हैगोया मौजूद कहीं बा'द नहीं दुनिया में— Daqiiq Jabaalii