Meaning of

इमरोज़

imroz • فردا

आज; वर्तमान

today; present day

آج; موجودہ دن

Persian

अमृता इमरोज़ साहिर सब कहानी है मुसाफ़िर तुम बताओ कौन चाहत में फ़ना करता है ख़ुद को — Gaurav Singh
दश्त में है इक ग़ज़ाला अमृता जैसी जिस की दुनिया का मुझे इमरोज़ होना है — Intzar Akhtar
ग़म-ए-फ़र्दा न मरने और जीने दे 'मनोहर' अब दिलों दिल में उसी से क्यूँँ उदासी ख़ूब छा जाती — Manohar Shimpi
उस का ही हरदम उस का ही हर रोज़ बनना है मुझ को तो इश्क़ में फिर एक इमरोज़ बनना है — Naviii dar b dar
फलदार पेड़ पर साहब पत्थर हज़ार चलते हैं — Kumar Aryan
फ़र्दा हो कि पस-ए-फ़र्दा मुझ को अब उम्मीद नहीं — Lekhak Suyash
आतिश-ए-इश्क़ में राख हर रोज़ बन जाना आसान नहीं हैं इश्क़ में इमरोज़ बन जाना — Ritesh Sharma
कि सियायत की दुनिया में आते ही आ जाती है तब्दीली कल के सारिक़ इमरोज़ यहाँ सत्ता के भागी हो जाते हैं — Sandeep dabral 'sendy'

इमरोज़ वर्तमान क्षण की सार्थकता को पकड़ता है, जो क्षणिक होते हुए भी महत्वपूर्ण होता है। कविता में, यह अक्सर भावनाओं और अनुभवों की तात्कालिकता का प्रतीक होता है, जो शाश्वत या अतीत के विपरीत होता है।

'इमरोज़' का उपयोग कवि वर्तमान की तात्कालिकता और क्षणभंगुरता की सुंदरता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर परिवर्तन, संक्रमण और जीवन की क्षणभंगुर प्रकृति के विषयों के साथ जोड़ा जाता है।

इमरोज़ हमें वर्तमान की अनमोलता की याद दिलाता है, हमें प्रत्येक क्षण का आनंद लेने के लिए प्रेरित करता है।