Meaning of

इमरोज़

imroz • فردا

आज; वर्तमान

today; present day

آج; موجودہ دن

Persian

इमरोज़ फिर नज़र आई मुझ को वो कल वाली लड़की
ज़ुल्फ़ें सँवारती वो ही पैकर मख़मल वाली लड़की

अक्सर गिर जाता हूँ मैं उस के गालों के गड्ढों में
जब जब मुलमुल मुस्काती है वो डिंपल वाली लड़की

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अमृता इमरोज़ साहिर सब कहानी है मुसाफ़िर
तुम बताओ कौन चाहत में फ़ना करता है ख़ुद को

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फ़र्दा हो कि पस-ए-फ़र्दा
मुझ को अब उम्मीद नहीं

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दश्त में है इक ग़ज़ाला अमृता जैसी
जिस की दुनिया का मुझे इमरोज़ होना है

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हुस्न से पर्दा-ए-इस्मत को हटा बहर-ए-ख़ुदा
मुझ सेे नाबीना को तू तिश्ना-ए-दीदार न रख

ख़्वाब-ए-फ़र्दा में ये कहता हूँ रक़ीब-ए-जाँ से
तू मेरी जान के रुख़्सार पे रुख़्सार न रख

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ग़म-ए-फ़र्दा न मरने और जीने दे 'मनोहर' अब
दिलों दिल में उसी से क्यूँँ उदासी ख़ूब छा जाती

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आतिश-ए-इश्क़ में राख हर रोज़ बन जाना
आसान नहीं हैं इश्क़ में इमरोज़ बन जाना

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उस का ही हरदम उस का ही हर रोज़ बनना है
मुझ को तो इश्क़ में फिर एक इमरोज़ बनना है

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कि सियायत की दुनिया में आते ही आ जाती है तब्दीली
कल के सारिक़ इमरोज़ यहाँ सत्ता के भागी हो जाते हैं

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फलदार पेड़ पर साहब
पत्थर हज़ार चलते हैं

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इमरोज़ फिर नज़र आई मुझ को वो कल वाली लड़की
ज़ुल्फ़ें सँवारती वो ही पैकर मख़मल वाली लड़की

अक्सर गिर जाता हूँ मैं उस के गालों के गड्ढों में
जब जब मुलमुल मुस्काती है वो डिंपल वाली लड़की

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अमृता इमरोज़ साहिर सब कहानी है मुसाफ़िर
तुम बताओ कौन चाहत में फ़ना करता है ख़ुद को

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इमरोज़ वर्तमान क्षण की सार्थकता को पकड़ता है, जो क्षणिक होते हुए भी महत्वपूर्ण होता है। कविता में, यह अक्सर भावनाओं और अनुभवों की तात्कालिकता का प्रतीक होता है, जो शाश्वत या अतीत के विपरीत होता है।

'इमरोज़' का उपयोग कवि वर्तमान की तात्कालिकता और क्षणभंगुरता की सुंदरता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर परिवर्तन, संक्रमण और जीवन की क्षणभंगुर प्रकृति के विषयों के साथ जोड़ा जाता है।

इमरोज़ हमें वर्तमान की अनमोलता की याद दिलाता है, हमें प्रत्येक क्षण का आनंद लेने के लिए प्रेरित करता है।