अदा हया ख़लिश से क्या वो बेनक़ाब हो गई
ख़बर हुई उसे तभी वो फिर 'अज़ाब हो गई
तबाह नस्ल को कहाँ शराब सिर्फ़ है करे
हर एक ख़्वाह से अभी वो बेहिसाब हो गई
ग़ज़ब लगे अदा तेरी मुझे खुले दिमाग़ से
फ़लक पे देख के लगे कि माहताब हो गई
सड़क पे हादिसा न हो इसीलिए चले चलो
ग़लत समझ से ही अभी ग़लत शराब हो गई
करे कोई भरे कोई अवाम बात क्यूँँ करें
कहावतें ही ख़ुद-ब-ख़ुद मेरा जवाब हो गई
यक़ीं करें पढ़े लिखे अगर कोई भी लड़कियाँ
रक़ीब इम्तिहान में वो कामयाब हो गई
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