Meaning of

इरम

irm • ارم

इरम; एक काल्पनिक स्वर्ग; अत्यधिक सुंदर स्थान

Iram; a mythical paradise; a place of great beauty

ارم; ایک خیالی جنت; بے حد خوبصورت جگہ

Arabic

फ़क़ीर-ए-शहर के तन पर लिबास बाक़ी है
अमीर-ए-शहर के अरमाँ अभी कहाँ निकले

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मेरा अरमान मेरी ख़्वाहिश नहीं है
ये दुनिया मेरी फ़रमाइश नहीं है

मैं तेरे ख़्वाब वापस कर रहा हूँ
मेरी आँखों में गुंजाइश नहीं है

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हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

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न हिंदू हूँ मैं नइँ मुसलमान हूँ मैं
दरिंदों की दुनिया में इंसान हूँ मैं

अदा कर मुझे तू इबादत के जैसे
मेरी जाँ तेरे दिल का अरमान हूँ मैं

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आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या
क्या बताऊँ कि मेरे दिल में है अरमाँ क्या क्या

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इस क़दर था खटमलों का चारपाई में हुजूम
वस्ल का दिल से मिरे अरमान रुख़्सत हो गया

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नहीं हर चंद किसी गुम-शुदा जन्नत की तलाश
इक न इक ख़ुल्द-ए-तरब-नाक का अरमाँ है ज़रूर

बज़्म-ए-दोशंबा की हसरत तो नहीं है मुझ को
मेरी नज़रों में कोई और शबिस्ताँ है ज़रूर

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ये क़त्ल-ए-आम और बे-इज़्न क़त्ल-ए-आम क्या कहिए
ये बिस्मिल कैसे बिस्मिल हैं जिन्हें क़ातिल नहीं मिलता

वहाँ कितनों को तख़्त ओ ताज का अरमाँ है क्या कहिए
जहाँ साइल को अक्सर कासा-ए-साइल नहीं मिलता

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दिल हुआ करता था पहले, अब कहाँ बाक़ी रहा
जल गए अरमान सारे, बस धुआँ बाक़ी रहा

हम कहो क्या क्या बताएँ, क्या है खोया इश्क़ में
ये जहाँ बाक़ी रहा ना वो जहाँ बाक़ी रहा

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रुत्बा नहीं रहता बिछड़ कर आशियाने से,
दीपक कहाँ रौशन हुआ, अरमाँ जलाने से

14

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फ़क़ीर-ए-शहर के तन पर लिबास बाक़ी है
अमीर-ए-शहर के अरमाँ अभी कहाँ निकले

13

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मेरा अरमान मेरी ख़्वाहिश नहीं है
ये दुनिया मेरी फ़रमाइश नहीं है

मैं तेरे ख़्वाब वापस कर रहा हूँ
मेरी आँखों में गुंजाइश नहीं है

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इरम एक खोए हुए स्वर्ग की छवि उत्पन्न करता है, एक ऐसा स्थान जो शाश्वत सुंदरता और शांति से भरा है। कविता में, यह अप्राप्य का प्रतीक है, एक स्वप्निल क्षेत्र जो सांसारिक दुनिया से परे है।

कवि अक्सर इरम का उपयोग एक आदर्श दुनिया को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह खोए हुए सपनों या आकांक्षाओं के लिए एक रूपक के रूप में कार्य करता है। यह जीवन की कठोर वास्तविकताओं के विपरीत है।

इरम शाश्वत लालसा का प्रतीक बना रहता है, जो अप्राप्य के परे की काव्यात्मक याद दिलाता है।