Meaning of

कर्ज़

karz • قرض

ऋण; कर्ज़; दायित्व

debt; obligation

قرض; ذمہ داری

Arabic

आशिक़ था ऐसा मैं कि दग़ा कर नहीं सका
वो बे-वफ़ा था जो कि वफ़ा कर नहीं सका

करता था मैं उसी से मुहब्बत यूँँ बे-पनाह
चाहत का क़र्ज़ यार अदा कर नहीं सका

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मेरी बरसों की उदासी का सिला कुछ तो मिले
उस से कह दो वो मेरा क़र्ज़ चुकाने आए

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उल्फ़त से दुनिया का बैर पुराना है
फिर भी दीवाने को शे'र सुनाना है

सबका कर्ज अदा कर के लौटा हूँ मैं
बस इक लड़की का बोसा लौटाना है

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ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
मैं जब तक घर न लौटूँ मेरी माँ सज्दे में रहती है

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अदा हुआ न क़र्ज़ और वजूद ख़त्म हो गया
मैं ज़िंदगी का देते देते सूद ख़त्म हो गया

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क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हाँ
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन

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मर न जाऊँ एक दिन ग़म से कहीं
सर-ब-सर कर्ज़े में डूबा हूँ ख़ुदा

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इस नदी की जवानी गिरवी है
क्या बहेगी रवानी गिरवी है

डूबी है बूँद-बूँद कर्ज़े में
बाँध में सारा पानी गिरवी है

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चूम कर ज़ख़्म फिर से हरा कर दिया
क्या लगा था तुम्हें मोजिज़ा कर दिया

आप के इश्क़ का क़र्ज़ था मुझ पे जो
काटकर हिज्र की शब अदा कर दिया

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दोस्ती की है अगर तू ने निभाऊँगा जरूर
क़र्ज़ अपना मैं मेरे यार चुकाऊँगा ज़रूर

जब तेरे सामने जाने की कभी सोचूँगा
इन निगाहों में नया ख़्वाब सजाऊँगा ज़रूर

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आशिक़ था ऐसा मैं कि दग़ा कर नहीं सका
वो बे-वफ़ा था जो कि वफ़ा कर नहीं सका

करता था मैं उसी से मुहब्बत यूँँ बे-पनाह
चाहत का क़र्ज़ यार अदा कर नहीं सका

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मेरी बरसों की उदासी का सिला कुछ तो मिले
उस से कह दो वो मेरा क़र्ज़ चुकाने आए

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कर्ज़ दायित्व और जिम्मेदारी का भार वहन करता है। कविता में, यह अक्सर उन बोझों का प्रतीक होता है जो हम उठाते हैं, चाहे वे ठोस हों या भावनात्मक, और वे संबंध जो हमें दूसरों से जोड़ते हैं।

कवि 'कर्ज़' का उपयोग कर्तव्य और बलिदान के विषयों की खोज के लिए करते हैं। इसे अक्सर एक श्रृंखला के रूप में चित्रित किया जाता है, जो व्यक्तियों को उनके पिछले कार्यों और वादों से बांधती है।

कर्ज़ उन बंधनों और बोझों की याद दिलाता है जो हम विरासत में पाते हैं। यह वादों की स्थायी प्रकृति और जिम्मेदारी के भार की बात करता है।