Meaning of

कर्ण

karn • کرن

कान; श्रवण; सुनना

ear; hearing; listening

کان; سننا; سماعت

Sanskrit

दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त
कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है

कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं
फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है

91

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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है
मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है

मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है
लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है

274

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कोई समुंदर, कोई नदी होती कोई दरिया होता
हम जितने प्यासे थे हमारा एक गिलास से क्या होता

ता'ने देने से और हम पे शक करने से बेहतर था
गले लगा के तुम ने हिजरत का दुख बाट लिया होता

164

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ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली
मेरी मौजूदगी में सो रही है

130

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जनाज़े पर मेरे लिख देना यारों
मोहब्बत करने वाला जा रहा है

126

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ख़ुशी से काँप रही थीं ये उँगलियाँ इतनी
डिलीट हो गया इक शख़्स सेव करने में

122

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तुम्हें इक मश्वरा दूँ सादगी से कह दो दिल की बात
बहुत तैयारियाँ करने में गाड़ी छूट जाती है

120

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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना
इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना

देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना
ये सारे खेल हैं, इन
में उदास मत होना

118

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सादा हूँ और ब्रैंड्स पसंद नहीं मुझ को
मुझ पर अपने पैसे ज़ाया' मत करना

100

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वो जिस पर उस की रहमत हो वो दौलत माँगता है क्या
मोहब्बत करने वाला दिल मोहब्बत माँगते है क्या

तुम्हारा दिल कहे जब भी उजाला बन के आ जाना
कभी उगता हुआ सूरज इजाज़त माँगता है क्या

98

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दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त
कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है

कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं
फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है

91

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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है
मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है

मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है
लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है

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'कर्ण' शब्द इंद्रिय जगत में गहराई से जड़ित है, सुनने की क्रिया का प्रतीक है। कविता में, यह भौतिकता से परे जाकर वास्तव में सुनने की क्रिया को दर्शाता है - शब्दों और ध्वनियों के सार को समझना और आत्मसात करना।

कवि अक्सर 'कर्ण' का उपयोग संचार और समझ के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह सुने जाने की लालसा या मौन की सुंदरता का प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह शब्द पाठकों को शब्दों से परे सुनने के लिए आमंत्रित करता है।

'कर्ण' सुनने की शक्ति की याद दिलाता है। कान के माध्यम से ही हृदय अक्सर अपनी आवाज़ पाता है।