Meaning of

कसक

kasak • کسک

दर्द; तड़प

ache; longing

درد; تڑپ

Persian

बन कर कसक चुभती रही दिल में मिरे इक आह थी ऐ हम–नफ़स मेरे मुझे तुझ सेे वफ़ा की चाह थी — Dhiraj Singh 'Tahammul'
ये ज़मीं की कसक है कि उस ने सनम बन के पर्वत है बादल को चूमा हुआ — Alankrat Srivastava
सभी कुछ छीन लो मुझ सेे ये मेरा दर्द मत छीनो कसक के बिन मेरी ये शा'इरी मर जाएगी तन्हा — Nityanand Vajpayee
कसक कोई जो दिल में है कहीं बाक़ी न वो रह जाए न जाने कोई लम्हा फिर न अश्कों में कहीं बह जाए — Manohar Shimpi
ये तू किस दुश्मनी की दिल में कसक लाया है ज़ख़्म भरने के लिए यार नमक लाया है — Rovej sheikh
कसकर गले लगाना उसे चाहता था मैं बस चाहने से मेरे ही क्या ख़ाक होता है — Aqib khan
इक कसक दिल में कहीं उठती है बे-सबब शे'र नहीं होता है — Shadan Ahsan Marehrvi

कसक एक सूक्ष्म, लगातार रहने वाला दर्द है जो दिल में बसा रहता है। यह कोई तीव्र पीड़ा नहीं है, बल्कि एक कोमल, निरंतर तड़प है जो भावनाओं को रंग देती है। कविता में, यह अक्सर अधूरी इच्छाओं या प्रेम की खट्टे-मीठे स्वभाव का प्रतीक होता है।

कवि 'कसक' का उपयोग तड़प की भावनात्मक गहराई को जगाने के लिए करते हैं। यह एक प्रेमी की मौन पुकार हो सकती है, एक अधूरे सपने की चुपचाप निराशा, या एक बीते पल की कोमल याद जो बनी रहती है।

कसक दिल की कोमल फुसफुसाहट है, जो तड़प में उलझी सुंदरता और दर्द की याद दिलाती है।