हुआ फिर सामना तुम सेे अजब ये ज़िंदगानी हैजगी दिल में कसक फिर से कि फिर आँखों में पानी हैख़ता मेरी मैं आया लौट कर जो शहर को अपनेतुम्हारा क्या रुलाने की तुम्हें आदत पुरानी है— Rehaan