Meaning of

काश्त

kasht • کاشت

खेती; कृषि; जुताई

cultivation; farming; tillage

کھیتی; زراعت; جوتائی

Persian

तू ने कहा न था कि मैं कश्ती पे बोझ हूँ
आँखों को अब न ढाँप मुझे डूबता भी देख

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मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूँ
पहली बारिश ही आख़िरी है मुझे

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हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समुंदर मेरा

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जब भी कश्ती मिरी सैलाब में आ जाती है
माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है

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बीच भँवर से कश्ती कैसे बच निकली
बहुत दिनों तक दरिया भी हैरान रहा

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पुरानी कश्ती को पार ले कर फ़क़त हमारा हुनर गया है
नए खेवइये कहीं न समझें नदी का पानी उतर गया है

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हम ने तुझ पे छोड़ दिया है
कश्ती, दरिया, भँवर, किनारा

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आता है जो तूफ़ाँ आने दे कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ है
मुमकिन है कि उठती लहरों में बहता हुआ साहिल आ जाए

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कोई शिकवा न करे बहते हुए पानी से
कश्तियाँ डूबी हैं कुछ अपनी ही मनमानी से

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सभी को ग़म है समुंदर के ख़ुश्क होने का
कि खेल ख़त्म हुआ कश्तियाँ डुबोने का

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तू ने कहा न था कि मैं कश्ती पे बोझ हूँ
आँखों को अब न ढाँप मुझे डूबता भी देख

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मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूँ
पहली बारिश ही आख़िरी है मुझे

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'काश्त' का मूल अर्थ भूमि की खेती करना है, जो पोषण और विकास की प्रक्रिया है। कविता में, यह अक्सर प्रेम की मेहनत, कुछ फलने-फूलने के लिए आवश्यक धैर्य, और बीज बोने के कार्य में निहित आशा का प्रतीक होता है।

कवि 'काश्त' का उपयोग श्रम और पुरस्कार की छवियों को उभारने के लिए करते हैं, जो धरती की मौन प्रतिज्ञा है। यह बंजरता के विपरीत है, प्रयास और फलन के चक्र को उजागर करता है।

'काश्त' प्रकृति और मानव आत्मा की मौन दृढ़ता को समेटे हुए है। यह धैर्य और उस अनदेखी मेहनत की बात करता है जो सुंदरता की ओर ले जाती है।