Meaning of

काश्त

kasht • کاشت

खेती; कृषि; जुताई

cultivation; farming; tillage

کھیتی; زراعت; جوتائی

Persian

मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूँ पहली बारिश ही आख़िरी है मुझे — Tehzeeb Hafi
जब भी कश्ती मिरी सैलाब में आ जाती है माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है — Munawwar Rana
पुरानी कश्ती को पार ले कर फ़क़त हमारा हुनर गया है नए खेवइये कहीं न समझें नदी का पानी उतर गया है — Uday Pratap Singh
आता है जो तूफ़ाँ आने दे कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ है मुमकिन है कि उठती लहरों में बहता हुआ साहिल आ जाए — Behzad Lakhnavi
सभी को ग़म है समुंदर के ख़ुश्क होने का कि खेल ख़त्म हुआ कश्तियाँ डुबोने का — Shahryar
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समुंदर मेरा — Nida Fazli
बीच भँवर से कश्ती कैसे बच निकली बहुत दिनों तक दरिया भी हैरान रहा — Madan Mohan Danish
हम ने तुझ पे छोड़ दिया है कश्ती, दरिया, भँवर, किनारा — Siddharth Saaz
कोई शिकवा न करे बहते हुए पानी से कश्तियाँ डूबी हैं कुछ अपनी ही मनमानी से — Waseem Barelvi
तू ने कहा न था कि मैं कश्ती पे बोझ हूँ आँखों को अब न ढाँप मुझे डूबता भी देख — Shakeb Jalali

'काश्त' का मूल अर्थ भूमि की खेती करना है, जो पोषण और विकास की प्रक्रिया है। कविता में, यह अक्सर प्रेम की मेहनत, कुछ फलने-फूलने के लिए आवश्यक धैर्य, और बीज बोने के कार्य में निहित आशा का प्रतीक होता है।

कवि 'काश्त' का उपयोग श्रम और पुरस्कार की छवियों को उभारने के लिए करते हैं, जो धरती की मौन प्रतिज्ञा है। यह बंजरता के विपरीत है, प्रयास और फलन के चक्र को उजागर करता है।

'काश्त' प्रकृति और मानव आत्मा की मौन दृढ़ता को समेटे हुए है। यह धैर्य और उस अनदेखी मेहनत की बात करता है जो सुंदरता की ओर ले जाती है।