Meaning of

कू-ए-बुताँ

koo-e-butaan • شیخ جی

मूर्तियों की गली; प्रेमिकाओं की गली

lane of idols; street of beloveds

بتوں کی گلی; محبوبوں کی گلی

Persian

निकले थे जैसे दोस्तों आदम बहिश्त से।
कू-ए-बुताँ से ऐसे निकाले गए हैं हम।

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इसी दुनिया में दिखा दें तुम्हें जन्नत की बहार
शैख़ जी तुम भी ज़रा कू-ए-बुताँ तक आओ

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उन से दोज़ख़ में पूछ बैठा हूँ
शैख़ जी आप और यहाँ कैसे

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ख़ुदा जाने के क्या आया गुमाँ में
चला आया हूँ मैं कू-ए-बुताँ में

चमन में फूल यूँँ नौहा कुनाँ है
कोई ले ले मुझे अपनी अमाँ में

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जाम-ए-लबरेज़ लिए दस्त-ए-मुबारक में शजर
शैख़ जी रोकिए मस्जिद की तरफ़ जाता है

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यूँँ लग रहा है कू-ए-बुताँ में मुझे शजर
जैसे मैं आज ख़ुल्द-ए-बरी में पहुँच गया

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मुनकिर-ए-इश्क़ के सीने से निकलता है धुआँ
जानिब-ए-कू-ए-बुतां मेरे क़दम उठते हैं

रोक लेती हैं वो आँखों का इशारा देकर
उन की महफ़िल से अगर जाने को हम उठते हैं

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कल ये पैग़ाम हर इक पीर-ओ-जवां तक पहुँचे
हाल-ए-अफ़सुर्दा में हम कू-ए-बुताँ तक पहुँचे

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निकले थे जैसे दोस्तों आदम बहिश्त से।
कू-ए-बुताँ से ऐसे निकाले गए हैं हम।

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इसी दुनिया में दिखा दें तुम्हें जन्नत की बहार
शैख़ जी तुम भी ज़रा कू-ए-बुताँ तक आओ

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अपने मूल अर्थ में, 'कू-ए-बुताँ' मूर्तियों से भरी जगह की छवि प्रस्तुत करता है, जो सौंदर्य और आकर्षण का रूपक है। कविता में, यह उन मोहक गलियों का प्रतीक बन जाता है जहाँ प्रेमिकाएँ रहती हैं, एक ऐसी जगह जो लालसा और चाहत से भरी होती है।

'कू-ए-बुताँ' का उपयोग कवि अक्सर प्रेमिका के निवास की रहस्यमयता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह मोहक रास्तों से गुजरने की यात्रा का संकेत देता है। यह साधारण गलियों के विपरीत, सपनों की दुनिया की झलक प्रदान करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'कू-ए-बुताँ' हृदय की तीर्थयात्रा का प्रतीक बन जाता है। यह पाठक को प्रेम और सौंदर्य की गलियों में भटकने के लिए आमंत्रित करता है।