Meaning of

खंज़र

khanzar • خنجر

छुरा; चाकू

dagger; knife

خنجر; چھری

Persian

दे दिए है दाग अब तो रंग जमना चाहिए
बस तिरे इस हाथ में ख़ंजर न दिखना चाहिए

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वो मेरी पीठ में ख़ंजर ज़रूर उतारेगा
मगर निगाह मिलेगी तो कैसे मारेगा

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मिरे ही वास्ते लाया है दोनो फूल और ख़ंजर
मुझे ये देखना है बस वो पहले क्या उठाता है

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तुझे कुछ याद भी है क्या मिरा उस रात में आना
छतों से कूदकर के फिर भरी बरसात में आना

कई मंज़र बने ख़ंजर चुभे मेरी निगाहों में
मुझे मिलने को पर तेरा किसी के साथ में आना

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झुके तो जन्नत उठे तो ख़ंजर
करेंगी हम को तबाह आँखें

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हाँ रहते हैं अब राहों में,
तुझ बिन तो हम बेघर निकले,

आशा थी मरहम दोगे तुम,
पर आखर सब ख़ंजर निकले

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इतने गहरे उतर गया हूँ दरिया-ए-दर्द-ए-दिल में
हाथ पकड़ कर खींच ले वरना डूब के भी मर सकता हूँ

कट्टे ख़ंजर रस्सी माचिस कुछ दिन मुझ सेे दूर रखो
कुछ करने से चूक गया हूँ मैं कुछ भी कर सकता हूँ

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दामन पे कोई छींट न ख़ंजर पे कोई दाग़
तुम क़त्ल करो हो कि करामात करो हो

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शहर-वालों की मोहब्बत का मैं क़ायल हूँ मगर
मैं ने जिस हाथ को चूमा वही ख़ंजर निकला

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किस काम के वो फूल जो सबने दिए मुझे
बेहतर है तेरे हाथ का ख़ंजर लगे मुझे

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दे दिए है दाग अब तो रंग जमना चाहिए
बस तिरे इस हाथ में ख़ंजर न दिखना चाहिए

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वो मेरी पीठ में ख़ंजर ज़रूर उतारेगा
मगर निगाह मिलेगी तो कैसे मारेगा

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'खंज़र' शब्द तीखेपन और खतरे की छवियाँ उत्पन्न करता है। कविता में, यह अक्सर विश्वासघात, अचानक दर्द, या सत्य की धार का प्रतीक होता है, जो एक आंतक प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है।

कवि 'खंज़र' का उपयोग विश्वासघात और तीखे सत्य के विषयों को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह अक्सर उपचार और शांति के शब्दों के विपरीत होता है, मानव अनुभव की द्वैतता को उजागर करता है।

कविता में, 'खंज़र' भ्रम के पर्दों को काटता है, वास्तविकता के कच्चे किनारों को प्रकट करता है।