तुझे कुछ याद भी है क्या मिरा उस रात में आनाछतों से कूदकर के फिर भरी बरसात में आनाकई मंज़र बने ख़ंजर चुभे मेरी निगाहों मेंमुझे मिलने को पर तेरा किसी के साथ में आना— nakul kumar