Meaning of

ख़ुर

khur • خور

सूरज; पोषण

sun; nourishment

سورج; پرورش

Persian

मेरे रुख़सार से ज़ुल्फ़ों को वो जब जब हटाता है
वो कहता है नज़र उस को मह-ए-ख़ुर्शीद आता है

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एक दिन की ख़ुराक है मेरी
आप के हैं जो पूरे साल के दुख

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वो गुलाबी पंखुरी थी बाग की
और मैं मकरन्द लेने आ गया

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हाए वो भीगा रेशमी पैकर
तौलिया खुरदुरा लगे जिस को

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काँटा सा जो चुभा था वो लौ दे गया है क्या
घुलता हुआ लहू में ये ख़ुर्शीद सा है क्या

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एक दिन बनेंगे ख़ाक हम
मिट्टी की हैं खुराक हम

भीतर ख़लाए साथ है
बाहरस ठीक-ठाक हम

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दरिया की गहराई गोताखोर बताएगा
ज़िंदा रहना है जिस को और डूबने जाता है

प्रेम की पीड़ा पूछो तो उस प्रेमी से पूछो
पूरे मन से जो फिर आधा प्रेम निभाता हैं

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हाथ के छालों को हक़ मिलता ज़माने में कहाँ
चापलूसी ही मलाई मारती है बस यहाँ

किस्मतों पर पड़ गए ताले हैं मेहनतकश के अब
बस चुग़ल-ख़ोरों के क़ाबू में है ये सारा जहाँ

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एक हो जाएँ तो बन सकते हैं ख़ुर्शीद-ए-मुबीं
वर्ना इन बिखरे हुए तारों से क्या काम बने

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मेरा दिल खुरदरा यूँँ ही नहीं है ये हसीनाओं
कई धोखों ने बे-माँसल बनाया है इसे छलकर

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मेरे रुख़सार से ज़ुल्फ़ों को वो जब जब हटाता है
वो कहता है नज़र उस को मह-ए-ख़ुर्शीद आता है

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एक दिन की ख़ुराक है मेरी
आप के हैं जो पूरे साल के दुख

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'ख़ुर' का मूल अर्थ सूरज है, जो जीवन को प्रकाशित और पोषित करता है। कविता में यह जीवन शक्ति और ऊर्जा के अटूट स्रोत का प्रतीक बन जाता है।

कवि अक्सर 'ख़ुर' का उपयोग सुबह और नवीनीकरण की छवियों को उभारने के लिए करते हैं। यह अंधकार के विपरीत, आशा और एक नई शुरुआत के वादे का प्रतीक है।

'ख़ुर' प्रकाश और जीवन के शाश्वत चक्र का प्रतीक है, सूरज की अडिग उपस्थिति की याद दिलाता है।